इतिहास

जनपद फैजाबाद उत्तर प्रदेश राज्य में सरयू के तट पर स्थित नगर है जो की राजधानी लखनऊ से १३० कि.मी. पूर्व में स्थित है| इस शहर की स्थापना बंगाल के नवाब अलीवर्दी खान ने की थी |फ़ैज़ाबाद की नींव अवध के दूसरे नवाब सआदत खान ने रखी थी|उनके उत्तराधिकारी सुजा-उद-दौला ने इसे अवध की राजधानी बनाया| फैजाबाद एक बस्ती के रूप में, लगभग 220 साल पहले विकसित हुआ था| अवध के दूसरे नवाब सफ़दर जंग (1739-54) ने इसे अपने सैन्य मुख्यालय के रूप में बनाया। उनके उत्तराधिकारी सुजा-उद-दौला ने किले का निर्माण किया|यह छोटा कलकत्ता के रूप में जाना जाता था, अब यह किला खंडहर में बदल गया है| उन्होंने 1765 में चौक बनाया और बाद में शहर के पश्चिम में फैजाबाद और असफाबाग और बुलंदबाग के दक्षिण में अंगूरबाग और मोतीबाग का निर्माण किया| सुजा-उद-दौला के शासनकाल के दौरान, फैजाबाद ने ऐसी समृधि प्राप्त की, जिसे यह नगर फिर कभी नहीं देख सका| नवाबों ने खूबसूरत इमारतों का निर्माण कराकर फैजाबाद को खूबसूरत बना दिया, इनमें गुलाब बारी, मोती महल और बहू बेगम की कब्र हैं।गुलाब बारी एक सुंदर वास्तुकला का सुंदर भवन है, चारों तरफ से दीवार से घिरे बगीचे है, दो बड़े द्वारों के माध्यम से यहाँ जाया जा सकता है|यह इमारतें विशेष रूप से उनके समावेशी स्थापत्य शैली के लिए दिलचस्प हैं। सुजा-उद-दौला की पत्नी सुप्रसिद्ध बहू बेगम थी, जिन्होंने 1743 में नवाब से शादी की और फैजाबाद में रहना जारी रखा, उनका निवास मोती-महल था| उनका मकबरा जवाहर बाग़ के निकट है, जहाँ उन्हें उनकी मृत्यु के पश्चात दफनाया गया|बेगम के मकबरे से शहर का नजारा दिखाई पड़ता है| बहू बेगम महान प्रतिष्ठा और गरिमा की महिला थी| फैजाबाद की अधिकांश मुस्लिम इमारतों का श्रेय उनको ही दिया जाता है| बहू बेगम की मृत्यु से अवध के कब्जे तक फैजाबाद अपनी कीर्ति खोता रहा| नवाब असफ उद-दौलिया द्वारा अपनी राजधानी लखनऊ स्थानांतरित करने के साथ ही फैजाबाद की गरिमा धीरे धीरे कम होने लगी| अयोध्या प्राचीन समय में कोसल राज्य की राजधानी एवं प्रसिद्ध महाकाव्य रामायण की पृष्ठभूमि का केंद्र थी| प्रभु श्री राम की जन्मस्थली होने के कारण अयोध्या को मोक्षदायिनी एवं हिन्दुओं की प्रमुख तीर्थस्थली में से माना जाता है |